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  • मेष राशि चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ
  • वृष राशि ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
  • मिथुन का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह
  • कर्क-ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
  • सिंह मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
  • कन्या ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
  • तुला रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
  • वृश्चिक तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
  • धनु ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
  • मकर भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
  • कुंभ – गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
  • मीन – दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

मेष- अश्विनी भरणी और कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण के संयोग से मेष राशि का निर्माण हुआ है। इसके स्वामी मंगल हैं एवं मंगल को सेनानायक का पद प्राप्त है। इस राशि के जातक साहसी, अभिमानी और मित्रों से प्रेम रखने वाले होते हैं।

वृषभ- वृषभ राशि कृतिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी और मृगाशिरा नक्षत्र के प्रथम और द्वितीय चरणों के संयोग से बनी है। इसका राशि स्वामी शुक्र है। मंत्रीमंडल में इसे मंत्री का पद प्राप्त है। इस राशि का जातक यदि कृष्ण पक्ष में जन्म ले तो उसे दमा इत्यादि होने की संभावना रहती है। इस राशि के जातक स्वभाव से गंभीर और विनम्रशील होते है।

मिथुन- मिथुन राशि मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय-चतुर्थ चरण, आर्द्रा नक्षत्र और पुनर्वसु के तीन चरणों के संयोग से बनी है। मिथुन राशि के स्वामी बुध है। बुध का पद युवराज का है। मिथुन राशि के जातक स्थिर बुद्धि के नहीं होते हैं। विषय में आसक्त होते हैं। प्राय: 30 वर्ष की उम्र के बाद इस राशि वालों का भाग्योदय होता है। बेईमानी से धन कमाना इन्हें रास नहीं आता। सामाजिक प्रतिष्ठा की चाहत हमेशा रहती है।

कर्क- कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण पुष्य और अश्लेषा नक्षत्रों से बनी है। इस राशि के राशि स्वामी चंद्र है। जब सूर्य इस राशि पर जाते है, तो सूर्य उत्तरायन से दक्षिणायन की ओर जाना प्रारंभ करते है। कर्क राशि वाले जातक भावुक, बुद्धिजीवी एवं कठिन से कठिन कार्य को सरलतम करने वाले होते हैं। कर्क राशि वाले मित्रों की राय पर अधिक विश्वास करने वाले होते हैं। इस कारण कभी-कभी इनके साथ धोखा भी होता है।

सिंह- सिंह राशि मघा, पूर्वा-फाल्गुनी और उत्तरा-फाल्गुनी के प्रथम चरण से बनी है। इसके राशि स्वामी सूर्य है। ग्रहमंडल में सिंह राशि राजा के पद पर अधिष्ठित है। इस राशि के जातक अत्यंत उग्र और क्रोधी स्वभाव के साथ स्पष्टवादी भी होते हैं। इस स्वभाव के कारण इस राशि के जातक संघर्षमय जीवन व्यतीत करते हैं। यदि इस राशि वाले जातक के जन्म लग्न के समय सूर्य कमजोर स्थिति में हो तो जातक को जोड़ों का दर्द, पेट और पाचन की तकलीफ रहती है।

कन्या- कन्या राशि उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र के तीन चरण हस्त नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र के दो चरणों के योग से बनी है। कन्या राशि का स्वामी बुध है। यह राशि रात्रि में बलवती होती है। कन्या राशि के जातक परिश्रमी, विषयासक्त,विघ्न-बाधाओं पर साधारण रूप से विजय प्राप्त करने वाले होते हैं। कन्या राशि के जातक परिवार के प्रति नि:स्वार्थ समर्पित रहते हैं।

तुला- तुला राशि चित्रा नक्षत्र के दो चरण स्वाति और विशाखा नक्षत्र के तीन चरणों के योग से बनी है। तुला राशि के राशि-स्वामी शुक्र है। यह दिन में बलशाली होती है। तुला राशि के जातक ईमानदार, सत्यप्रिय, न्यायवादी, प्रलोभन से मुक्त एवं त्यागी स्वभाव के होते हैं। परिश्रमी, शांतिप्रिय एवं परिजनों से स्नेहभाव रखने वाले होते हैं।

वृश्चिक- वृश्चिक राशि विशाखा नक्षत्र के एक चरण अनुराधा नक्षत्र और ज्येष्ठा नक्षत्र से बनी है। वृश्चिक राशि का राशि-स्वामी मंगल है। यह रात्रि में बलशाली होकर उत्तर दिशा की स्वामी है। इस राशि के जातक कठोर परिश्रमी, चरित्रवान, ईमानदार, जिद्दी एवं अपनी वाणी पर टिके रहने वाले होते हैं। विपरीत स्थिति को अनुकूल बनाने में चतुर होते हैं, अधिकतर 25 वर्ष की उम्र के बाद ही इनका भाग्योदय होता है।

धनु- धनु राशि मूल नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण से बनी है। धनु राशि के राशि-स्वामी गुरु है। ग्रहमंडल में इसे प्रधानमंत्री का पद प्राप्त है। यह दिन में बलशाली होकर पूर्व दिशा की स्वामी है। धनु राशि वाले जातक सरल स्वभाव वाले, संतोषी एवं हर परिस्थिति से समझौता करने वाले होते हैं।

मकर- मकर राशि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तीन चरण श्रवण एवं घनिष्ठा नक्षत्र के दो चरणों से बनी है। मकर राशि पर जब सूर्य आते हैं, तो पवित्र उत्तरायन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। मकर राशि के राशि स्वामी शनि है। मकर राशि का बल रात्रि एवं दिशा दक्षिण है। इस राशि के जातक सामाजिक गुण प्रधान होते हैं। यह दूसरों का अहित करने में हिचकिचाते नहीं है। दिल के कठोर एवं जिद्दी होते हैं। वैवाहिक सुखोपभोग के साधन इन्हें सशक्त रूप से प्राप्त होते है।

कुंभ- कुंभ राशि घनिष्ठा नक्षत्र के दो चरण शतभिषा और पूर्वा-भाद्रपदा नक्षत्र के तीन चरणों से बनी है। कुंभ राशि के राशि-स्वामी शनि देव है। यह दिन में बलशाली रहती है एवं इसकी दिशा पश्चिम है। कुंभ राशि के जातक शांत प्रकृतियुक्त, अथक पराक्रमी, दूरदर्शी, चंचल प्रवृति वाले, ओजस्वी, अपने लक्ष्य के प्रति दृढ-संकल्पित और कामी होते है।

मीन- मीन राशि पूर्वा-भाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण उत्तरा-भाद्रपदा और रेवती नक्षत्र से बनी है। मीन राशि के राशि-स्वामी गुरु है। यह राशि रात्रि में बलशाली रहती है एवं इसकी दिशा उत्तर है। मीन राशि वाले जातक स्वच्छ-ह्रदय और एकाकी प्रवृति के होते हैं। यह हमेशा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए योजनाओं में उलझे रहते हैं। मीन राशि वाले अधिकतर दाम्पत्य जीवन में दुखी रहते हैं।

ज्योतिर वेद विज्ञान
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