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आज कई लोग दूरभाष के द्वारा पूछ रहे थे , क्या सावन के महीने में “”काल सर्प “” योग की शान्ति करवा सकते है।
जब की इस योग का आधार ज्योतिष शास्त्र के प्रामाण्य ग्रंथो में कही उदृत नहीं है। न ही कशी , मिथिला और देश के अन्य संस्कृत विस्वविद्यालयो में ज्योतिष विभाग में इस योग के ऊपर चर्चा होती है। न प्राचीन त्रिस्कंध ज्योतिष के पूर्वाचार्य लोग किसी के आजीवन कुंडली निर्माण किये है उसमे वर्णित किये है। मैंने भारत वर्ष के कई ज्योतिष के मूर्धन्य विद्वान गुरुजनो से””काल सर्प योग”” के बारे में जिज्ञासा की तो कोई प्रमाण परम्परागत नहीं प्राप्त हुआ।
कई पूर्वा चार्यो के ग्रन्थ का अबलोकन् किये परन्तु इस योग का आधार नहीं मिला। सर्प भय योग ,सरपदंशयोग आदि देखने को मिला। परन्त्तु 20,25 वर्षो से सम्पूर्ण देश में इस काल सर्प योग का भय कितने जातको को शता रहा है।इसलिये मन में ये प्रश्न वरम्बार उठता है।

(1) क्या है इसका आधार ??
(2) ज्योतिष के कौन सी प्रमाणिक ग्रन्थ में है आधार??
(3) ज्योतिष के 18 प्रवर्तक में किसने की चर्चा ??
(4)काहे डरते है लोग ??
(5) किसलिये करबाते है सवालाख महामृत्युंजय जप शान्ति के लिए।
(6) त्र्यम्बकेस्वर में ही शांति क्यों ??
ये विचारणीय है ?? आज के समय में ज्योतिष शास्त्र की दशा और दिशा दोनों बदल रही है । आप लोगोँ का क्या मत है??

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